हमारा इतिहास
बैकुण्ठवा पंचायत, प0 चम्पारण जिला मुखयालय से दक्षिण नौतन प्रखण्ड के मध्य में स्थित है। प्रखण्ड मुखयालय से इसकी दूरी 4 कि.मी. और जिला मुखयालय से इसकी दूरी 10 कि.मी. है।पंचायत की कुल आबादी 13140 है जिसमें पुरूष लगभग 7500 तथा महिलाओं की संखया 5640 है। पंचायत में छोटे-बडे़ कुल 15 टोले हैं। पंचायत के बीचो-बीच ''भांगड'' नदी है, जिसके दोनों ओर बस्तियाँ हैं।
ऐतिहासिक रूप से यह पंचायत निलहों के आश्रय स्थल के रूप में विखयात है। यहीं पर हरदिया मन के किनारे निलहों की कोठी थी जो आज भी हरदिया कोठी के नाम से जाना जाता है। विदित हो कि चम्पारण में निलहों की तीन कठिया प्रथा के अंतर्गत नील की खेती होती थी तथा हरदिया कोठी पर ही नील फैक्ट्री में नील तैयार कर विदेशों में भेजा जाता था, जिसके अवशेष आज भी मौजूद है। इस पंचायत में 23000 हेक्टेयर उपजाउ कृषि योग्य भूमि पर खेती होती है, जिसमें मुखय रूप से हल्दी, आलू, गेहूँ, धान, मक्का इत्यादि फसलें उगायी जाती है। कृषि मजदूरों की संखया ज्यादा है तथा आम लोगों के पास खेती की जमीन कम होने के कारण ज्यादातर मजदूर पलायन कर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और केरल में चले जाते हैं तथा साल में दो बार कुल समय के लिए घर आते हैं।
बेतिया राज में पुरोहित का काम करने वाले दूबे परिवार को दक्षिणा के रूप में 75 एकड़ खेती की जमीन दान स्वरूप प्राप्त हुई है जो अन्य जमीने के साथ यहां के जमीनदार परिवार की श्रेणी में आते हैं। इस पचांयत का एक टोला जयनगर आदर्श ग्राम योजना के लिए घोषित किया गया है। यहां की मुखय पेशा कृषि एवं मछली पालन है।